यह चमत्कारी मंदिर समुद्र से प्रकट होकर दिन में दो बार दर्शन देता है।। क्या है इसके पीछे की कहानी

भारत में कई प्राचीन एवं चमत्कारी मंदिर है। ऐसा ही एक प्राचीन मंदिर गुजरात के वडोदरा के समीप कावी कम्बोई गांव के कैम्बे तट पर स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर है जिसकी अपनी एक अलग ही विशिष्ट पहचान है। इसका महत्व इस बात से लगाया जा सकता है कि अति प्राचीन शिव-पुराण एवं स्कन्द-पुराण में इसका जिक्र है।

स्वयं शिव-पुत्र कार्तिकेय द्वारा स्थापित इस मंदिर में हिन्दुओं की गहरी श्रद्धा एवं आस्था है और इसी कारण पूरे देश से हज़ारों श्रध्दालु यहाँ दर्शन के लिए आते है। दिन में दो बार यह मंदिर समुद्र की गोद में समा जाता है तथा फिर प्रकट होकर भक्तों को दर्शन देता है, इसलिए इसे ‘गायब मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है। हालाँकि ऐसा किसी चमत्कार की वजह से नहीं बल्कि प्रकृति के कारण उठने वाले ज्वार-भाटा की वजह से होता है।

इस मंदिर की स्थापना के पीछे एक रोचक पौराणिक कहानी है। कहा जाता है कि ताड़कासुर नमक एक असुर ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया तथा यह वरदान पाया कि उसकी मृत्यु केवल एक शिव पुत्र के हाथों ही हो सकती है और वह भी जब वो शिव पुत्र महज ६ दिनों का हो। यह वरदान पाने के पश्चात ताड़कासुर निरंकुश हो उठा और उसके अत्याचार से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। तब सारे देवता एवं ऋषि-मुनि के अनुरोध पर भगवान शिव ने श्वेत पर्वत कुंड से कार्तिकेय को उत्पन्न किया और ६ दिन के कार्तिकेय ने ताड़कासुर का वध किया।

उस असुर को मारने के उपरान्त कार्तिकेय को मालूम हुआ कि असुर ताड़कासुर परम शिव-भक्त था और इस कारण वह ग्लानि से भर उठे। तब भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि यह विधि का विधान था और उन्होंने ताड़कासुर के वध स्थल पर एक शिव मंदिर की स्थापना करने को कहा जिससे शिव भक्त ताड़कासुर का नाम दुनियावाले हमेशा जान सके।

प्रदोष, पूर्णमासी एवं एकादशी को पूरी रात यहाँ पूजा अर्चना की जाती है। पूरे देश में इस मंदिर की ख्याति फैली हुई है।

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