जप में माला का प्रयोग ।। आस्था, प्रथा, या चमत्कार?

पूजा पाठ में माला के उपयोग का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि भगवान के हर अलग रूप की आराधना तथा मंत्र जाप अलग अलग प्रकार की माला से करनी चाहिए। ऐसा करने से ईश्वर जल्दी प्रसन्न होकर मनुष्य की इच्छा पूर्ति करते हैं।

रुद्राक्ष की माला

रुद्राक्ष की माला सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है। इस माला का जाप भगवान शंकर, माता पार्वती, गणेश जी, स्वामी कार्तिक तथा माता गायत्री को प्रसन्न करने हेतु किया जाता है। ऐसी मान्यता व्याप्त है कि रुद्राक्ष की माला गले में धारण करने से मनुष्य को हृदय रोग में चमत्कारिक लाभ मिलता है तथा यह माला अकाल मृत्यु से भी बचाती है।

स्फटिक की माला

माँ दुर्गा, माँ काली, माँ लक्ष्मी एवं माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए लोग स्फटिक की माला प्रयोग में लाते है। यह माला आर्थिक बल प्रदान करने के अलावा मानसिक शान्ति मे भी लाभदायक है जो कि स्वास्थ्य के हिसाब से अत्यंत गुणकारी है।

सफ़ेद चन्दन की माला

इसे आस्था कहें या विश्वास, पर ऐसा मानना है कि इस माला को धारण करने से मनुष्य में सकरात्मक विचारों का प्रवाह होता है जिस कारण ईश्वर जल्दी प्रसन्न होते है।

लाल चन्दन की माला

माँ दुर्गा की आराधना कर उन्हें प्रसन्न करने में लाल चन्दन की माला का जाप सबसे प्रमुख एवं सटीक माना जाता है। लोगों में यह दृढ़ विश्वास है कि इस माला के प्रयोग से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है तथा लोगों के कार्य पूर्ण होते है। अर्थात यह भाग्योदय प्रदान करता है।

तुलसी की माला

भगवान श्री राम, श्री कृष्ण, सूर्यदेव इत्यादि देवों की आराधना करते वक़्त तुलसी की माला से जाप करना श्रेष्ठकर माना जाता है। इस माला से १०८ बार मंत्रों का जाप किया जाता है। इस माला को गले में धारण करने से शरीर और आत्मा दोनों का ही शुद्धिकरण होता है तथा यह मनुष्य को सत्कर्म करने की प्रेरणा देती है।

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