Panchatantra Stories With Moral

बहुत समय पहले की बात है, एक दिन एक लोमड़ी इधर-उधर घूमते हुए अनजाने में ही एक थियेटर के समान-कक्ष में प्रवेश कर जाती है। वहां रखे विभिन्न प्रकार की वेशभूषा और वस्त्रों को देखकर वो अचंभित हो जाती है। वहां पड़े राजा के वस्त्रों को पहनकर और उसे आईने में देखकर वह नाचने लगी। फिर उसने सैनिक के वस्त्र देखा, और उसे पहनकर वो सैनिको जैसा अभिनय करने लगी।

अचानक उसकी दृष्टि फर्श पर पड़े एक मुखौटे पर पड़ी, जिसे देखते ही वह डर गई। उसने मुखौटे को दीवार के पीछे फेंक कर अपने मन में बुद्बुदायी, ये जरूर कोई अलौकिक शक्ति है। और डरते हुए भगवान का नाम जपने लगी।

कुछ क्षण बाद उसे भूख लगने लगी। लोमड़ी ने तय किया और मुखौटे के पास गई और उसे जाँचने लगी। पर उसे मुखौटे से कोई हरकत होती नजर नहीं आई। वह उसे देर तक घूरती रही, फिर हिम्मत जुटा कर मुखौटे के पास गई और उसने देखा की मुखौटे ने उसका कोई नुकसान नहीं किया। अब लोमड़ी ने उसे उठाया और ध्यान से देखने लगी। उसके बाद उसे ज्ञात हुआ कि थियेटर में इस मुखौटे को कलाकार इस्तेमाल करते हैं। फिर वो अपनी मूर्खता पर बहुत हंसी और कमरे से बाहर चली गई!

Moral of story: इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की डर एक मानसिक उपज से ज्यादा और कुछ नहीं है।

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