Real life inspirational stories

ये कहानी है सियालकोट में जन्में महाशय धर्मपाल हट्टी जी की, जिनके बचपन में उनके घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी।

महाशय जी अभी छोटे थे लेकिन जैसे-जैसे वो बड़े होने लगे, इनके माता-पिता इनको स्कूल भेजने लगे लेकिन वहां पर पढ़ने-लिखने में इनका थोड़ा सा भी मन नहीं लगता था। अध्यापक पढ़ाते रहते और ये क्लास में ही सो जाते।

इनके पिता जी इनको समझा-समझा कर थक गये कि बेटा पढ़-लिख ले नहीं तो जीवन में किसी काम का नहीं रह जयेगा तू, लेकिन उन सब बातों का इनपर थोड़ा सा भी असर नहीं हुआ और ये पाँचवीं क्लास में फेल हो गये।

और अब इनके पिता को भी पता चल गया था कि ये पढ़ने-लिखने वाला नहीं है और उन्होंने महाशय जी का नाम कटवाकर एक बढ़ई के दुकान पर काम पर लगा दिया लेकिन वहां पर भी कुछ दिन काम करने के बाद इन्होंने वहां से भी नौकरी छोड़ दी।

15 साल की उम्र होने तक महाशय जी करीबन 50 नौकरी छोड़ चुके थे।

सियालकोट में उस समय लाल मिर्च का बिजनेस बहुत अच्छा चल रहा था और इसीलिये इनके पिता जी ने एक छोटी सी लाल मिर्च की दुकान खोलकर इनको वहां बैठा दिये।

इनका बिजनेस अच्छा चल रहा था लेकिन उन दिनों आजादी के लिये आंदोलन ज़ोरों से चल रहा था और 1947 में जब देश आजाद हुआ और हिंदुस्तान-पाकिस्तान का बटवारा हुआ तो सियालकोट पाकिस्तान में चला गया।

जहाँ पर उस समय हिंदुओं पर बहुत अत्याचार किया जाता था, चारो तरफ दंगे का माहौल था, हिंदुओं को मारा-पीटा जा रहा था और इसीलिये ये पाकिस्तान से किसी तरह नानक डेरा (हिंदुस्तान) आ गये। जहाँ पर इनके पास अब 1500 रुपये के सिवाय और कुछ भी नहीं था।

अपने परिवार के साथ कई मील चलकर किसी तरह ये अमृतसर पहुँचे।

करोलबाग, दिल्ली में इनके कुछ रिश्तेदार रहते थे और यही सोचकर ये दिल्ली आ गये। दिल्ली में इन्होंने एक पुराना तांगा खरीदा चलाने लगे लेकिन इस काम में उनको मजा नहीं आ रहा था और इन्होंने उसको भी छोड़ दिया।

इनको ये भी पता था कि मसाला बनाने और बेंचने के सिवा इनको कुछ आता भी नहीं और इन्होंने वही किया।

ये बाजार से मसाला खरीदकर लाते उसको खुद ही पीसते और फिर बाजार में बेंचने जाते। धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ने लगा और लोगों की demand भी बढ़ने लगी और इसीलिये अब ये मसाला पीसने के लिये एक चक्की वाले के देने लगे।

एक दिन जब ये चक्की वाले के यहां मसाला लेने के लिये गये तो इन्हें पता चला कि वो मसाले में मिलावट करता है। ये बात महाशय जी को अच्छी नहीं लगी और उन्हें गुस्सा भी बहुत आया क्योँकि उनका बिजनेस केवल उनके ईमानदारी की वजह से ही चल रही थी।

और इन्होंने उस चक्की वाले के यहां मसाला पिसवाना बंद कर दिया और खुद के घर पर ही एक छोटी सी चक्की ले आये और खुद ही मसाला पीसने लगे और बेंचने लगे।

धीरे-धीरे बिजनेस और बढ़ा तो इन्होंने एक छोटी सी मसाला पीसने वाली factory खोल दी, और इसी तरह जैसे-जैसे बिजनेस बढ़ता गया ये नयी-नयी factory डालते गये।

और आज वो कम्पनी एक करोड़ों की कंपनी बन गयी है जिसको हम और आप M.D.H Pvt. Limited के नाम से जानते हैं।

ये तो थी किसी एक इंसान की कहानी, लेकिन ऐसे कई लोग हैं इस दुनियां में जिनके पास एक दिन कुछ भी नहीं था लेकिन आज सब कुछ है। और इन सब एक बात जो सबसे common है, वो है कि इन सबने अपनी करोड़पति बनने की journey को एक छोटे से level से सुरू किया है।

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