Funny Moral Stories

 कछुओं का समर वैकेसन

 एक जंगल मे कछुओं का एक परिवार अपना घर बनाकर रहता था, एक दिन उन सबके दिमाग में एक खयाल आया कि बहुत दिन हो गये हम सब कहीं घूमने नहीं गये तो चलो कहीं घूमने जाते हैं।                           

आपको तो पता होगा कि कछुओं की जो आयु होती है वो दूसरे जीवों की तुलना मे बहुत ज्यादा होती है और ये काफी धीरे भी चलते हैं।

लेकिन ये जो परिवार था इनके धीरे चलने के साथ-साथ इनका दिमाग भी बहुत धीरे चलता था और इसीलिये इनको ये decide करने मे सात साल बीत गये कि हमें जाना कहां है और रुकना कहां ह !

जगह decide करने के बाद इनको एक साल और लग गये रास्ते के लिये खाना बनाने और पैकिंग करने में।

जहां पर इन लोगों का ट्रिप था वहा पहुँचने में इनको दो साल और लग गये।

वहा पहुँचकर ये सब खुब टहले घूमे, टहलने-घूमने के बाद सबको भूख लग गयी और सबने सोचा कि अब खाना खाया जाय भूख के मारे पेट में चूहे कूद रहे हैं।

और खाने के लिये सब एक गोला बनाकर बैठ गये और जब टिफिन खोला तो उन्हें पता चला कि नमक तो वो लाये ही नहीं।

अब सब सोचने लगे कि नमक लाने के लिये अब किसको भेजा जाय तो उनमे से जो सबसे बुजुर्ग कछुआ था उसने कहा कि छोटे को भेज दो क्यूँकि वो अभी छोटा और फुर्तीला है तो वो जल्दी से जाकर ले आयेगा।

सब उस बुजुर्ग कछुए के बात से सहमत हो गये और उस छोटे को बुलाकर जब नमक लाने को बोला गया तो उसने साफ इनकार कर दिया कि मैं नमक लेने नहीं जाऊँगा, नहीं तो तुम सारा खाना खत्म कर दोगे और मुझे कुछ नही मिलेगा।

पूरे परिवार न छोटे को आस्वासन दिया और विश्वास दिलाया कि हम तुझसे promise करते हैं कि जब तक तु लौट कर वापस नहीं आयेगा तब तक खाने को कोई हाथ तक नहीं लगायेगा।

सबके बहुत समझाने के बाद छोटा रोते-चिल्लाते और गुस्से के साथ नमक लेने के लिये निकल पड़ा।

छोटे के निकलने के बाद परिवार वालो ने अनुमान लगाया कि हम लोगों को यहाँ तक पहुँचने के लिये काफी दिन लग गये लेकिन छोटा अभी फुर्तीला है तो जल्दी आ जायेगा।

और परिवार वालो ने खाना पैक कर के वापस रख दिया और छोटे का इंतेजार करने लगे।

इंतेजार करते-करते 1 साल गुजर गये…..2 साल गुजर गये…..3 साल गुजर गये लेकिन अभी तक छोटे का नमक लेकर लौटने का नामो-निशान नही मिला।

अंत में इतना इंतेजार करने के बाद परिवार वालो की भूख बरदाश्त नहीं हो रही थी और उन्होंने सोचा कि छोटा अभी पता नहीं कब तक लौटकर आये और तब तक तो भूख के मारे हमारी जान निकल जायेगी तो इसलिये यही अच्छा है कि अब जैसा भी हो बिना नमक के ही हम खाना खा लेते हैं।

और जैसे ही उन लोगो ने टिफिन का ढक्कन खोला और रोटी निकाली तैसे वहाँ पेड़ के पीछे छुपकर बैठा हुआ छोटा कूद कर छलांग लगाकर बाहर आया और बोला “देखा मुझे पता था कि आप लोग बहुत धोखेबाज हो, मेरे साथ विस्वासघात करोगे, अब तो मैं नमक लाने बिल्कुल नहीं जाऊँगा।”

Promise करने के बाद भी आप लोगों ने मुझे धोखा दिया अब मैं आप लोगों की बात कभी नहीं मानूगा।

सीख:

Funny hindi stories with moral : वैसे तो इस कहनी से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है लेकिन एक जो सबसे अछी बात इस कहानी से निकल कर आती है वो है कि “आप अपने लिये जैसा सोचते हो आप को वही मिलता है” बिल्कुल छोटे कछुए कि तरह।

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