Funny & Moral Story

बहुत समय पहले विजयनगर नाम का एक नगर था। उसमें कई गांव थे। जिसमें रामपुर नाम का एक गांव था। उस गांव में शिव का एक सुंदर मंदिर था। उस मंदिर के पुजारी का नाम रामेश्वर था।

गांव के सब रामेश्वर को बहुत मान पूर्वक व्यवहार करते थे। क्योंकि वह उस गांव के मंदिर का पुजारी था। परंतु वह बड़ा आलसी था। उसके साथ ही वह हमेशा भगवान भरोसे रहता था। और वह सब को भगवान भरोसे रहने को कहता थे।

 वह कहता कि मैं भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त हूं। मैंने भगवान की जीवन भर बहुत पूजा कि है, इसीलिए मैं कोई भी चिंता नहीं लेता हूं।

क्योंकि मुझे अपने भगवान पर भरोसा है। वह मुझे कोई भी परेशानी में से निकालेंगे। कई लोग उनको इतना भी भगवान भरोसे ना होने को कहते। परंतु वह किसी की बात नहीं सुनता था।

एक बार की बात है। रामपुर में एक बहुत बड़ी मुसीबत आ गई। दरअसल बात ऐसी थी कि रामपुर में एक बहुत बड़ा बांध था। वह बांध की दीवाल अब बहुत कमजोर हो गई थी। बांध की दीवार कमजोर होने के कारण नदी का पानी उसमें से बाहर निकल रहा था।

इस परेशानी का समाधान निकालने के लिए उस गांव के सरपंच ने एक सभा बुलाई। उस सभा में मंदिर का पुजारी रामेश्वर भी था।

सरपंच ने कहा कि, “बांध की दीवाल अब बहुत कमजोर हो गई है। और उसमें से पानी निकल रहा है। तो हमें इसका कोई ना कोई समाधान निकालना ही होगा।”

सभा में से किसी ने इस बारे मे जिलाधिकारी को बताने को कहा। जिससे वह इसका कोई समाधान दे सकें। सरपंच को यह बात पसंद आयी। और सरपंच और गांव के दो-तीन लोग जिलाधिकारी से इस बारे में बात करने के लिए गए।

जिलाधिकारी को पूरी बात बताई। तब जिलाधिकारी और कई ओर बड़े अफसर ने बांध की जांच की।

जांच के बाद जिलाधिकारी ने सरपंच से कहा कि, “इस बांध की दीवाल अब बहुत ही कमजोर हो गई है। इसकी वजह से अब नदी का पानी कभी भी आपके गांव में आ सकता है और इसके कारण आपका गांव डूब जाएगा। इसलिए जितना हो सके उतनी जल्दी आप गांव वालों को गांव खाली करने के लिए कहे।”

 सरपंच ने ठीक ऐसा ही किया। उसने किसी के द्वारा यह सारी बात गांव वालों तक पहुंचाई‌। सारे गांव वालों यह बात सुनकर घबरा गए।

 सारे गांव वालों अपना-अपना कीमती सामान लेकर गांव छोड़कर जाने लगे। परंतु इस बीच रामेश्वर शिव मंदिर के आसपास आंगण में बैठा था। वहां जाते हुए लोगों ने उसे गांव छोड़ने के लिए कहा।

परंतु रामेश्वरने उनसे कहा की, “मुझे कुछ नहीं होगा मुझे अपने भगवान पर पूरा भरोसा है। मैं समस्या से भागने वालों में से नहीं हूं।” और ऐसे ही वह बैठा रहा।

 गांव में धीरे धीरे-धीरे नदी का पानी घुस रहा था। कुछ समय बाद अब पानी पुजारी के पैरों को छु रहा था। तब भी वह भागने का सोच भी नहीं रहा था।

उसी समय एक घुड़सवार जा रहा था। उससे पूजारी को अपने घोड़े पर बैठने को कहा।

 उसने कहा कि, “आप जल्दी से जल्दी मेरे घोड़े पर बैठ जाइए। क्योंकि जल्द ही गांव डूबने वाला है।” उसने उस घुड़सवार की भी बात न मानी। वह तब भी बैठा रहा।

5 से 6 घंटे बाद अब पूरा गांव डूब चुका था। क्योंकि नदी का सारा पानी अब गांव में आ गया था। वह पुजारी मंदिर के टोच पर धजा पकड़कर खड़ा था। वह बचाने को चिल्ला भी नहीं रहा था।

तभी वहां से एक हेलीकॉप्टर उसको बचाने के लिए आया। हेलीकॉप्टर में से एक फौजी ने रस्सी उस पुजारी की तरफ रस्सी फेंकी और फौजी ने कहा कि, “इस रस्सी को पकड़कर ऊपर आ जाओ।”

 उसने उस फौजी की बात भी ना मानी‌। उसने कहा कि, “मुझे अपने भगवान पर पूरा भरोसा है कि वह मुझे बचाने जरूर आएंगे।” ऐसा कह कर वह धजा पकड़ कर खड़ा रहा।

कुछ समय बाद सारा नदी का पानी पूरे गांव में फैल चुका था‌। और इसी के साथ ही वह पूजारी भी डूब कर मर गया था।

वह मर कर भगवान शिव के पास पहुंचा। उसने भगवान शिव से नाराज़ होकर बड़े गुस्से से बोला कि, “मैंने पूरी जिंदगी आपकी सेवा में लगा दी। मैंने आपकी पूरे मन से सेवा की। मैं आपके भरोसे ही आखिर तक उस गांव में धजा पकड़कर खड़ा रहा। पर फिर भी आप मुझे बचाने के लिए वहां नहीं आए, ऐसा क्यों?”

 भगवान बोले की मैं जानता हूं की, “तुमने मेरी बहुत मन से सेवा की है। मैं तुम्हें बचाने के लिए आया था।”

वह पुजारी चौक कर बोला कब?

तब भगवान शिव बोले, “मैं तुम्हें तीन बार बचाने को आया। पर तुम माने ही नहीं।

 पहली बार उन लोगों के रूप में, दूसरी बार घुड़सवार के रूप में और तीसरी‌ और आखिरी बार में उस फौजी के रूप में आया था। पर तब भी तुमने अपने आप को बचाना ना समझा।”
 वह पूजारी बोला कि, “वह आप नहीं थे‌। वह तो सामान्य लोग ही थे।”

तब भगवान बोले कि, “मैं किसी को बचाने के लिए नहीं आता। उनको खुद ही अपने आप को बचाना होता है। मैं तो सिर्फ बचाने के लिए झरिया भेज सकता हूं।

खुद को बचाना ना बचाना यह आपके हाथ में है। अगर मैंने महाभारत में शस्त्र उठाए होते तो मैं चुटकियों में महाभारत को खत्म कर सकता था।

 पर फिर भी मैंने अपने शस्त्र नहीं उठाए। इसीलिए मैं तुम्हें बचाने नहीं आया। पर बचाने के लिए जरिए भेजे जो तुमने ठुकरा दिए। इसीलिए यह तुम्हारी गलती है।”

सीख:

 भगवान पर विश्वास रखना बहुत अच्छी बात है। पर भगवान भरोसे बैठे रहना बहुत घातक है। जैसा कि आपने इस कहानी में देखा कि वह पुजारीने जीवनभर भगवान की सेवा की। तब भी वह मर गया क्योंकि समस्या का समाधान और समस्या का सामना इंसान को ही करना पड़ता है। भगवान कभी भी आपकी मदद नहीं करते।

आपको अपनी मदद खुद ही करनी पड़ती हैं। हमें हमेशा यह बात को ध्यान में रखना चाहिए कि भगवान सिर्फ रास्ता दिखा सकते हैं उस रास्ते पर चलना तो आपको ही पड़ता है।

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