आज की खूबसूरत ग़ज़लें

आदमी आदमी को क्‍या देगा 
जो भी देगा वही ख़ुदा देगा

मेरा कातिल ही मेरा मुनिसफ़ है
क्‍या मेरे हक में फ़ैसला देगा

ज़िंदगी को करीब से देखो
इसका चेहरा तुम्‍हें रुला देगा

हमसे पूछो ना दोस्‍ती का सिला
दुश्‍मनों का भी दिल हिला देगा

-सुदर्शन फ़ाकिर

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कभी दो क़दम, कभी दस क़दम, कभी सौ क़दम भी निकल सके
मेरे साथ उठके चले तो वे, मेरे साथ-साथ न चल सके

तुझे देखे परदा उठाके जो किसी दूसरे की मजाल क्या!
ये तो आइने का कमाल है कि हज़ार रंग बदल सके

तेरे प्यार में है पहुँच गया, मेरा दिल अब ऐसे मुक़ाम पर
कि न बढ़ सके, न ठहर सके, न पलट सके, न निकल सके

मेरी ज़िन्दगी है बुझी-बुझी, मेरे दिल का साज़ उदास है
कभी इसको ऐसी खनक तो दे, तेरे घुँघरुओं पे मचल सके

जो खिले थे प्यार के रंग सौ, कभी पँखुरियों में गुलाब की
उन्हें यों हवा ने उड़ा दिया, कि पता भी आज न चल सके

-गुलाब खंडेलवाल

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जो कुछ है मेरे दिल में वो सब जान जाएगा । 
उसको जो मैं मनाऊँ तो वो मान जाएगा ।

बरसों हुए न उससे मुलाकात हो सकी,
दिल फिर भी कह रहा है, वो पहचान जाएगा ।

दामन तेरे करम का, न मुझको अगर मिला,
तू ही बता कहाँ मेरा अरमान जाएगा ।

‘अंदाज़’ बढ़ती जाएगी दीवानगी यूँ ही,
मेरी तरफ अगर न तेरा ध्यान जाएगा ।

– अनिल कुमार ‘अंदाज़’

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