ग़ज़ल

हर घड़ी यूँ ही सोचता क्या है?
क्या कमी है ,तुझे हुआ क्या है?

किसने जाना है, जो तू जानेगा
क्या ये दुनिया है और ख़ुदा क्या है?

दर-बदर खाक़ छानते हो तुम
इतना भटके हो पर मिला क्या है?

खोज लेंगे अगर बताए कोई
उसके घर का मगर पता क्या है?

एक अर्जी खुशी की दी थी उसे
उस गुज़ारिश का फिर हुआ क्या है?

हम ग़रीबों को ही सतायेगी
ज़िंदगी ये तेरी अदा क्या है?

मुस्कुरा कर विदाई दे मुझको
वक़्ते-आखिर है , सोचता क्या है?

दर्द पर तबसिरा किया उसने
हमने पूछा था बस दवा क्या है?

बेवफ़ा से ही पूछ बैठे “ख़याल”
क्या बाताये वो अब वफ़ा क्या है?

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