Category: Ghazals

Gajal

हाथ से बीतते हुए लम्हों को कैसे रोकूँ,जो मुकद्दर-ए-ज़िन्दगी है उसे कैसे टोकूं,खुदा न करे कि ऐसा लम्हा आये,जो सारी ख्वाहिशों को संग ले जाए,इजाज़त बस खुदा से इतनी चाहिए,जितनी भी ज़िन्दगी है बस...

Gazal

हाथ से बीतते हुए लम्हों को कैसे रोकूँ,जो मुकद्दर-ए-ज़िन्दगी है उसे कैसे टोकूं,खुदा न करे कि ऐसा लम्हा आये,जो सारी ख्वाहिशों को संग ले जाए,इजाज़त बस खुदा से इतनी चाहिए,जितनी भी ज़िन्दगी है बस...

ग़ज़ल

कोई जाता है यहाँ से न कोई आता है,ये दीया अपने ही अँधेरे में घुट जाता है। सब समझते हैं वही रात की किस्मत होगा,जो सितारा बुलंदी पर नजर आता है। मैं इसी खोज...

ग़ज़ल

कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है, बिछड़ना मजबूरी था, मिलना भी ज़रूरी है।   आज सुन भी जाओ, ये फलसफा जो मजबूरी है, दिल तोड़ना फिर सिलना, ये कैसी फितूरी है।  ...

ग़ज़ल

तमन्ना छोड़ देते हैं… इरादा छोड़ देते हैं,चलो एक दूसरे को फिर से आधा छोड़ देते हैं। उधर आँखों में मंज़र आज भी वैसे का वैसा है,इधर हम भी निगाहों को तरसता छोड़ देते...

गजल

खूबसूरत शहर, ये अलग बात हैरोज बरसे कहर, ये अलग बात हैदूध, घी की नदी मुल्क में बह रहीपी रहे है जहर ये अलग बात हैकोई तूफां समंदर में आता नहींकांपती है लहर ये...

ग़ज़ल

क्या हक़ीक़त कहूं कि क्या है इश्क़ – मीर तक़ी मीर क्या हक़ीक़त कहूं कि क्या है इश्क़हक़-शनासों के हां ख़ुदा है इश्क़ दिल लगा हो तो जी जहां से उठामौत का नाम प्यार का है इश्क़...

ग़ज़ल

हर घड़ी यूँ ही सोचता क्या है?क्या कमी है ,तुझे हुआ क्या है? किसने जाना है, जो तू जानेगाक्या ये दुनिया है और ख़ुदा क्या है? दर-बदर खाक़ छानते हो तुमइतना भटके हो पर...

मेरे अल्फाज़ क्या ज़िंदगी होती है बेटियों की

क्या जिंदगी होती है बेटियों की ?क्या जिंदगी होती है बेटियों की ?ये बेटियां ही समझे, किसी ने सही समझा नही… जन्म लेना, पलना, बढ़ना कहीं,ज़िंन्दगी के पूरे लम्हें बिताना कहीं,मां-बाप के घर रौशन...

ग़ज़ल

कहीं वो ग़ज़ल तो नहींचंचल हिरनी झरने सी उन्मुक्त हंसीहुस्न बेमिसाल पूरी कायनात सीकहीं वो ग़ज़ल तो नहीं।कंचन काया तरासी सुवर्ण सीघनी जुल्फें घनघोर घटा सीकहीं वो ग़ज़ल तो नहीं।दिल में चुभी नज़र इक...